वइन्नक लअला खुलूकीन अज़ीम ( अल क़ुरआन ) बेशक हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अखलाके अज़ीमा अता किये ....।
आइये अल्लाह के रसूल के अखलाक अज़ीमा और क़ुरआन की इस आयत की तस्दीक करता हुआ एक वाक़या देखें।
क्या होता है अखलाक अज़ीमा (Akhlaq Azeema) ???
एक बूढी अम्मा थी .....उसका रास्ते में घर था। रसूलल्लाह का आते जाते उसके घर के पास से रोज़ गुज़रना होता है और वो बुढ़िया की एक आदत ये होती है के वो अपने घर का सारे दिन का जमा किया हुआ कूड़ा कचरा रसूलल्लाह पर डाल दिया करती है. रोज़ का यही मामूल था. अचानक एक दिन रसूलल्लाह उसके घर के पास से गुज़रते है लेकिन कचरा डालने वाला कोई नहीं.
रसुलल्लाह पूछते हैं तो पता चलता है आप पर कचरा डालने वाली बूढी अम्मा बीमार है आज. रसूलल्लाह जाते हैं उसके घर ...घर के बच्चों में एक दहशत आजाती है के शायद आज ये बदला लेंगे डर जाते हैं।
लेकिन रसूलल्लाह वहां जाकर बीमार पुरसी करते है खैर खबर लेते हैं बुढ़िया अम्मा की।
ये सब देख कर उस बुढ़िया की आँखों से आंसू जारी हो जाते हैं। और कहने लगती है कि इतना तो हमदर्द और दुश्मन से भी प्यार करने वाला तो कोई अल्लाह का भेजा हुआ नुमाइंदा ही हो सकता है ....और वो बुढ़िया फ़ौरन क़लमा पढ़ती है और ईमान ले आती है।
कमाले अखलाके अज़ीमा इसी को कहा क़ुरआन ने...
"वइंनक लअला खुलुकीन अज़ीम"
वो मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम बेशक अखलाके अज़ीमा के मालिक हैं।


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