हर सलाह/नमाज के बाद बिना किसी से बात किये
आयतल कुर्सी एक बार
सूरह अत-तलाक (कुरान सूरह नं 65) आयत नं 2, और 3, "वा मुन यात ती किल्लाह हो… ..तक…। कदरा में कद जा आ लाल ला हो ले कुल ले शे।” :…………एक बार
सूरह फातिहा एक बार
सूरह इखलास 3 बार
दरूद/सलावत 3 बार
फिर आसमान पर दम(फूको) करो
इस वज़ीफ़ा के पाठक को निम्नलिखित मिलेगा:
अल्लाह सीधे उसकी आत्मा को खुद ले जाएगा। मृत्यु का कोई दूत उसके पास उसकी आत्मा को लेने नहीं आएगा।
अल्लाह उसकी आत्मा को बिना किसी हसब के सीधे स्वर्ग भेज देगा।
जीवन में उसका जोखिम (आय) हमेशा बहुत बड़ा रहेगा। पैसों को लेकर कभी परेशानी नहीं होगी।
उसकी कब्र बहुत चौड़ी होगी।
वह इमान के साथ मर जाएगा

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